हरियाणा:शहीद आशीष की 15 किमी. लंबी तिरंगा यात्रा निकाली, हर आंख नम, दो दिन गांव में नहीं जला चूल्हा – Haryana: Crowd Gathered At The Last Farewell Of Martyr Major Ashish Dhaunchak

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शहीद मेजर आशीष धौंचक को शुक्रवार को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। टीडीआई सिटी से पैतृक गांव बिंझौल तक करीब 15 किलोमीटर लंबी यात्रा में शहर से लेकर गांव तक के लोगों ने शहीद को सैल्यूट किया। गांव के बच्चों से लेकर युवा और महिलाएं भी शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। खास तौर पर शहीद की तीन वर्षीय बेटी वामिका अंतिम यात्रा में शामिल हुई, जिसे देख हर किसी की आंखें भर आईं। साथ ही जब तक सूरज चांद रहेगा, आशीष तेरा नाम रहेगा नारों से शहर और गांव गूंज उठे।

मेजर आशीष धौंचक (36) का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह करीब छह बजे उनके टीडीआई स्थित नए घर पर सेना के विशेष वाहन में लाया गया। इसके बाद सेना के विशेष वाहन से ही उनके पैतृक गांव बिंझौल में लाया गया। इस दौरान टीडीआई से करीब 50 मोटरसाइकिलों का काफिला साथ चला। गांव के युवा जीटी रोड स्थित गोहाना मोड़ पर शहीद की यात्रा में शामिल हुए। वे तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाते और यात्रा पथ पर फूल बरसाते हुए चले।



गांव के श्मशान घाट पर करीब 11 बजे पार्थिव शरीर पहुंचा। मकानों और श्मशान घाट के आसपास फैक्टरी की छतों पर चढ़कर ग्रामीणों ने शहीद को अंतिम विदाई दी। यहां सेना के ब्रिगेडियर राम नरेश सहित नौ वरिष्ठ अधिकारियों ने उनको पुष्प चक्र भेंट किया। इनके अलावा पानीपत शहर विधायक प्रमोद विज, ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा, राज्यसभा सांसद कृष्णलाल पंवार के भाई रोहताश पंवार, उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने पुष्प चक्र भेंट किया।


दुख की इस घड़ी में मेजर के परिवार के साथ सरकार : सीएम

उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सांत्वना व संदेश शहीद के परिजनों तक पहुंचाया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मेजर आशीष को श्रद्धांजलि देते हुए अपना शोक संदेश भेजा। मुख्यमंत्री ने शोक संदेश में कहा कि प्रदेश सरकार दुख की इस घड़ी में मेजर आशीष के परिवार के साथ खड़ी है। मां भारती के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले मेजर आशीष के बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके इस सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।


मेजर आशीष के बहादुरी के किस्से गाते रहे ग्रामीण

मेजर आशीष अपने बचपन में बिंझौल गांव में ही रहे। उनकी प्राथमिक शिक्षा गांव में ही हुई। इस दौरान उनके दोस्तों व गांव के लोगों ने उनकी बहादुरी के किस्से याद किए और सैल्यूट किया। ग्रामीण नर सिंह ने बताया कि मेजर आशीष बचपन से ही बहादुर और मिलनसार था। वह बचपन में खेलते समय भी सेना में जाने की बात करता था।


गांव में सुबह ही पहुंची सेना की टीम

बिंझौल के श्मशान घाट में शुक्रवार सुबह करीब छह बजे सिख रेजीमेंट के अंबाला से जवान लेफ्टिनेंट कर्नल वीएस कुटेजा के नेतृत्व में पहुंचे। इसके साथ ही गांव के मौजिज लोग पहुंच गए। जवानों ने अंतिम विदाई को लेकर अपने स्तर पर तैयारियां की। कैप्टन मृदुल पांडेय ने पुष्प चक्र तैयार कराए। मेजर आशीष धौंचक के पार्थिव शरीर को श्मशान घाट के गेट से अंदर तक सम्मान के साथ ले जाया गया। सेना के जवानों ने इसकी अगुवाई की और अधिकारी कंधा देकर चलें। यहां आकर राजकीय सम्मान दिया। साथ ही शहीद के पिता लालचंद, मां कमला देवी, पत्नी ज्योति व तीनों बहनों को तिरंगा भेंट किया।


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