Sc:तलाक की बढ़ती प्रवृत्ति के बावजूद भारतीय समाज में शादी जिंदगीभर के लिए अमूल्य रिश्ता, अदालत की टिप्पणी – Supreme Court Refuses To Grant Divorce To Couple Says Marriage Still Pious In Indian Society

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Supreme Court refuses to grant divorce to couple says Marriage still Pious In Indian Society

सुप्रीम कोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत तलाक की राहत देने के लिए ‘विवाह की असाध्य टूट’ के फॉर्मूले को हमेशा सामान्य रूप में स्वीकार करना वांछनीय नहीं है। शीर्ष कोर्ट ने कहा, तलाक के मामले दायर करने की बढ़ती प्रवृत्ति के बावजूद भारतीय समाज में विवाह को जीवन भर के लिए पति-पत्नी के बीच पवित्र, आध्यात्मिक और अमूल्य रिश्ता माना जाता है।

जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने यह मानते हुए कि विवाह न सिर्फ कानून के अक्षरों से, बल्कि सामाजिक मानदंडों से भी शासित होता है, क्रूरता, परित्याग या विवाह की असाध्य टूट के आधार पर 89 वर्षीय सेवानिवृत्त विंग कमांडर की तलाक की याचिका खारिज कर दी। याचिका में दावा था, दोनों पक्ष कई वर्षों से अलग रह रहे हैं, पर पत्नी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा-वह ‘तलाकशुदा’ होने के कलंक के साथ मरना नहीं चाहती।

विवाह से निकलते हैं कई रिश्ते

पीठ ने कहा, इस तथ्य से अनजान नहीं होना चाहिए कि विवाह संस्था महत्वपूर्ण है। कई रिश्ते वैवाहिक संबंधों से पैदा होते और पनपते हैं। इसलिए तलाक के लिए स्ट्रेट-जैकेट फॉर्मूले के रूप में ‘विवाह की असाध्य टूट’ के फॉर्मूले को मंजूर करना वांछनीय नहीं होगा। पत्नी की भावनाओं व उनके सम्मान का ख्याल रखते हुए पुरुष के पक्ष में विवेक का प्रयोग, पत्नी के साथ अन्याय होगा।






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