Up Cabinet:गंगा एक्सप्रेस वे के 2782 करोड़ जीएसटी का जिम्मा यूपीडा को, तेज होगा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस का काम – Up Cabinet: Upda Is Responsible For Rs 2782 Crore Gst Of Ganga Expressway

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UP Cabinet: UPDA is responsible for Rs 2782 crore GST of Ganga Expressway

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस- वे
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


गंगा एक्सप्रेस वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे के निर्माण को तेज गति देने के लिए प्रदेश सरकार ने दो प्रस्तावों को मंजूर किया है। पीपीपी मोड के कार्यों पर जीएसटी 12 फीसदी से 18 फीसदी होने की वजह से अतिरिक्त 6 फीसदी जीएसटी की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार करेगी। इसी तरह गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण में कैशफ्लो का संकट दूर करने के लिए भुगतान की शर्त में राहत दी गई है। इस प्रस्ताव से राज्य सरकार पर 2781.97 करो़ड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार पड़ेगा।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे परियोजना के पैकेज-1 और पैकेज-2 परियोजना के निर्माणकर्ताओं ने सरकार से राहत मांगी थी। कोविड महामारी की वजह से ठेकेदारों के समक्ष कैशफ्लो की समस्या दूर करने की मांग की गई थी। इसे स्वीकार करते हुए इस परियोजना के निर्माणकर्ताओं को कान्ट्रैक्ट प्राइज वेटेज में 31 मार्च 2024 तक राहत दी गई है। इसके तहत ठेकेदारों को जो भुगतान तीन से साढ़े तीन किलोमीटर एक्सप्रेस वे बनाने पर किया जाता था, उसे घटाकर डेढ़ किलोमीटर कर दिया गया है। यही नियम एनएचएआई में भी लागू है, जिसे यूपीडा ने भी प्रभावी कर दिया है। इस फैसले से परियोजना को समय से पूरा करने में मदद मिलेगी।

गंगा एक्सप्रेस वे के पीपीपी मोड में निर्माण को 30 वर्ष की छूट अवधि दी गई है। इस अवधि में लगने वाली जीएसटी को केंद्र सरकार ने 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया। 30 वर्ष की अवधि तक अतिरिक्त जीएसटी भार को यूपीडा वहन करेगा। इसमें तीन वर्ष की निर्माण अवधि भी शामिल है।

ललितपुर में पशुपालन विभाग की 1472 एकड़ जमीन पर बनेगा फार्मा पार्क, एक लाख करोड़ का निवेश

ललितपुर में पशुपालन विभाग की जमीन पर फार्मा पार्क स्थापित किया जाएगा। पशुपालन विभाग की 2000 एकड़ जमीन में से 1472.33 एकड़ जमीन औद्योगिक विकास विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। वैश्विक निवेश सम्मेलन में खाद्य एवं सुरक्षा औषधि प्रशासन ने फार्मा कंपनियों के साथ 184 समझौते किए गए थे। इनमें प्रदेश में 1.02 लाख करोड़ रुपये के निवेश के एमओयू किए गए थे। इन समझौतों को धरातल पर उतारने के लिए ललितपुर में फार्मा पार्क की स्थापना का फैसला लिया गया है।

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर के मुताबिक मुताबिक फार्मा पार्क के लिए पशुपालन विभाग के अधीन मडावरा और महरौनी तहसील के गांवों में फैली 2000 एकड़ जमीन में से करीब 1472.33 एकड़ जमीन औद्योगिक विकास विभाग को दी जाएगी। इस जमीन का विकास क्लस्टर के रूप में किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी यूपीसीडा को दी गई है। केंद्र सरकार द्वारा फार्मा सेक्टर को दी जा रही रियायतों का लाभ यहां लगने वाली इकाइयों को मिल सकेगा। इसके तहत ललितपुर की तहसील मडावरा के गांव सैदपुर में ए-1 ब्लाक में 170 एकड़ भूमि, ए-2 ब्लाक में 312 एकड़, सुकरवाडा में 9.46 एकड़ यानी कुल 491 एकड़ जमीन को चिन्हित किया गया है। इसके अलावा गांव गढौलीकलां तहसील महरौनी, लरगन गांव, करोंदा गांव, रामपुर गांव में जमीन ली जाएगी।

एक्सप्रेस वे के किनारे औद्योगिक गलियारों बसाने के लिए यूपीडा को बीडा देगा धनराशि

प्रदेश के पांचों एक्सप्रेस वे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारों को तेजी से विकसित करने का रास्ता खुल गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथारिटी (यूपीडा) को जरूरी बजट का संशय दूर हो गया है। अब औद्योगिक गलियारों को विकसित करने पर होने वाले खर्च की धनराशि नवगठित बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) देगा। इन्हे विकसित करने पर जो खर्च आएगा, उसे बीडा के लिए आवंटित 3000 करोड़ रुपये में से यूपीडा को लोन के रूप में दिया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे, पूर्वांचल एक्सरप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ औद्योगिक गलियारे विकसित करने का फैसला किया है। इसका जिम्मा यूपीडा को दिया गया है। यूपीडा के पास इस मद में अपना वित्तीय स्रोत नहीं है। इस वजह से यूपीडा द्वारा स्वयं के स्रोतों से शर्त के अनुसार 50 फीसदी वित्तपोषण संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में यूपीडा को बीडा को दिए गए 3000 करोड़ रुपये में से आवश्यक धनराशि देने के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी। 

ये फैसला वित्त वर्ष 23-24 और आगे के वर्षों पर भी लागू रहेगा। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह के मुताबिक इस निर्णय से राज्य सरकार पर आने वाला खर्च लोन के रूप में होगा। केंद्र से इस परियोजना में कोई मदद नहीं ली जाएगी। इसी के साथ औद्योगिक गलियारों को समयसीमा के अंदर पूरा किया जा सकेगा। उनके मुताबिक परियोजना को समय से पूर्ण किए जाने से लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज होगी और भारी मात्रा में रोजगार सृजन होगा।

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